सुपौल जिले के नगर पंचायत सिमराही में कार्यपालक पदाधिकारी (EO) पर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगा है। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता कर दावा किया कि नगर पंचायत में 2.49 करोड़ रुपये की खरीदारी में गंभीर अनियमितताएं बरती गई हैं। अनिल सिंह के मुताबिक, सिमराही नगर पंचायत में महज 17 दिनों के भीतर 2.49 करोड़ रुपये की खरीदारी की गई। इसके लिए जेम (GeM) पोर्टल पर 10 अलग-अलग बिड जारी की गई थीं, जिनमें आठ कंपनियों ने हिस्सा लिया। लेकिन चयन प्रक्रिया में केवल चार एजेंसियों को ही काम दिया गया, जो सभी नालंदा जिले की बताई जा रही हैं।

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उन्होंने आरोप लगाया है की EO वीणा वैशाली, जो स्वयं नालंदा की निवासी हैं, ने जानबूझकर अपने गृह जिले की एजेंसियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह चयन किया। साथ ही यह भी कहा गया कि नियमों के विपरीत एक कंप्यूटर ऑपरेटर को बायर बनाकर खरीदारी कराई गई, जबकि विभागीय निर्देश के अनुसार यह जिम्मेदारी किसी सरकारी वेतनमान कर्मी को दी जानी चाहिए। आरटीआई कार्यकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई से कराने की मांग की है। आरोपों के सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

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वहीं, नगर पंचायत सिमराही की EO वीणा वैशाली ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि सभी प्रक्रियाएं विभागीय गाइडलाइन के अनुसार पूरी पारदर्शिता के साथ की गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी एजेंसी का किस जिले से होना महज संयोग हो सकता है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है।