बिहार की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। राज्य में 15 अप्रैल को नयी सरकार के गठन की चर्चा के बीच आज मुख्यमंत्री आवास पर एक अहम् बैठक होने जा रही है। इस बैठक को लेकर सत्ता गलियारों में अटकलें तेज हो गई है, क्योंकि इसमें संभावित मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों की संख्या और विभागों के बंटवारे जैसे अहम् मुद्दों पर चर्चा होने की सम्भावना है। 

सूत्रों के अनुसार, अगले दो दिनों में इन सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इसी को देखते हुए बीजेपी और जदयू दोनों दलों के विधायकों को पटना में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। जो विधायक अभी तक नहीं पहुंचे हैं, उन्हें भी जल्द राजधानी पहुंचने के लिए कहा गया है। इस बीच पटना में सियासी माहौल को और गर्म करने वाला एक और घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री आवास और जदयू दफ्तर के बाहर लगे पोस्टरों में “युवा जनसेवक निशांत कुमार” को लेकर संदेश दिए गए हैं। पोस्टर में लिखा है कि बिहार में “ना बुलडोजर बवाल चाहिए और ना ही दंगा-फसाद”, बल्कि एक नए चेहरे की जरूरत है। इससे राजनीतिक अटकलों को और हवा मिल गई है।

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बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को मौजूदा सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अगर यह बैठक होती है तो इससे जुड़े नोटिफिकेशन जल्द जारी किए जा सकते हैं। राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन होगा और फिर 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण प्रस्तावित है।

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शनिवार को दोनों डिप्टी सीएम और अन्य नेताओं की मुख्यमंत्री आवास पर हुई मुलाकात ने भी इन अटकलों को बल दिया है। नेताओं का कहना है कि राज्य में जो भी फैसला होगा, वह नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही होगा। वहीं, विपक्ष और अन्य नेताओं के बयान भी सियासी तापमान बढ़ा रहे हैं, जिससे साफ है कि आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।