नई दिल्ली: शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की साथ ही राज्यसभा के पूर्व उप सभापति हरिवंश को भी शुक्रवार को राष्ट्रपति ने सदस्य के रूप मनोनीत किया और शुक्रवार को ही उन्होंने भी शपथ ग्रहण की। हरिवंश के राज्यसभा में मनोनयन पर अब कांग्रेस ने निशाना साधा है और कहा कि अगर उन्हें राज्यसभा भेजना ही था तो भाजपा से भेज देते लेकिन कलाकारों की सीट क्यों खा गये।

कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शायद यह पहली बार हो रहा है कि कोई व्यक्ति पहले किसी राजनीतिक दल से सांसद हुआ और फिर बाद में उन्हें राष्ट्रपति ने मनोनीत किया है। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या यह कला और संस्कृति के विभूतियों के साथ अन्याय नहीं है कि उनकी सीट पर राजनीतिक दल के सदस्य को मनोनीत किया जा रहा है। अगर उन्हें राज्यसभा भेजना ही था तो फिर भाजपा से भेज देते लेकिन यह मनोनयन बहुत पीड़ादायक है।

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बता दें कि पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद उनकी सीट पर राष्ट्रपति ने हरिवंश को मनोनीत किया है। माना जा रहा है कि वे एक बार फिर से राज्यसभा में उपसभापति बन सकते हैं और उनका कार्यकाल 2032 तक होगा। बता दें कि हरिवंश जदयू की तरफ से पहली बार 2014 में राज्यसभा भेजे गये थे और फिर दुबारा 2020 में। 2020 में उन्हें राज्यसभा का उपसभापति भी बनाया गया। 2026 के राज्यसभा चुनाव में उनकी जगह पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद ही राज्यसभा गए और अब उन्हें राष्ट्रपति ने मनोनीत कर उच्च सदन में भेजा है।

बता दें कि संसद के उच्च सदन में अधिकतम कुल 250 सदस्य हो सकते हैं जिसमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जा सकता है। इन 12 सीटों पर कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले लोगों को राष्ट्रपति के द्वारा मनोनीत किया जाता है। फ़िलहाल राज्यसभा में 245 सदस्य हैं।

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