पटना: भारत लोकतंत्र की जननी तो है ही, एक पुरानी सभ्यता का इतिहास भी इससे जुड़ा हुआ है। देश में आदिकाल से महिलाओं को सम्मान दिया जाता रहा है और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधी आबादी को नीति निर्धारण की प्रक्रिया में भागीदार बनाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया। उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया था कि इस अधिनियम को संसद में पास कर माताओं और बहनों के आशीर्वाद के भागी बनें। यह देश की महिलाओं के लिए महायज्ञ के समान है। ऐसा माना जा रहा था कि विपक्ष भी इस विधेयक का समर्थन करेगा और देश एक एतिहासिक कानून के साथ आगे बढ़ेगा। देश के उच्च सदनों के साथ ही राज्य के सदनों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और महिला विकास की दिशा में देश रफ्तार पकड़ेगा।

केंद्र सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध विपक्ष ने किया और सदन में गिरा दिया। विपक्ष ने पिछले 30 वर्षों में महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त करने में देरी की और अब एक बार फिर से उन्हें निराश कर दिया है। इंडी अलायन्स के लोगों ने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने और अपने स्वार्थ में महिलाओं के हित को एक बार फिर से दरकिनार कर दिया। विपक्ष के लोगों ने भारतीय महिलाओं के पॉलिटिकल रिप्रजेंटेशन को कमजोर किया है तथा उन्हें टेबल पर सीट मिलने से रोक कर अपने राजनैतिक स्वार्थ की रक्षा की है। यह कोई राजनैतिक विषय नहीं था फिर विपक्ष ने महिलाओं को रोक दिया जो कि नफरत और तिरस्कार दिखाता है। 

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एक बार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए महिलाओं का अपमान किया था जिसमें कोर्ट ने मुस्लिम पुरुषों को पत्नियों को गुजारा भत्ता देना जरूरी बताया था। इसके बाद मौलानाओं ने हंगामा किया तो राजीव गांधी ने फैसला ही पलट दिया था फिर बाद में मोदी सरकार ने उसे ठीक किया। आज एक बार फिर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व और बराबरी के मुद्दे को झटका दिया है। विपक्ष कहता है कि उसने पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण का समर्थन किया था। कांग्रेस ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि वहां उन्हें अपनी स्थिति का कोई खतरा नहीं था। महिला आरक्षण विधेयक पर भी विपक्ष ने हमेशा कहा कि हम समर्थन करते हैं लेकिन...। इन लोगों ने हमेशा टेक्निकल तरीके से एक लेकिन किन्तु परन्तु लगाये रखा।

कांग्रेस और सहयोगी दलों ने कब कब किया महिलाओं का अपमान

सबसे पहले 1996 में एचडी देवगौड़ा सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया था। इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया, रिपोर्ट भी आई लेकिन सरकार गिर गई जिसके बाद यह बिल वहीं रुक गया। 1998 से 2003 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस बिल को पास करवाने की चार बार कोशिश की लेकिन हर बार उन पार्टियों ने नाकाम कर दिया जिसके साथ आज कांग्रेस खड़ी है। सपा ने वेल में घुस कर हंगामा किया था तो RJD ने चालाकी से बिल को रोक दिया था। उन्होंने कहा था कि पहले OBC कोटा लायें, महिलाएं इंतजार कर सकती हैं। 1998 में राजद सांसद सुरेंद्र प्रकाश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक का डॉक्यूमेंट छीन कर फाड़ दिया था। 2004 से 2014 तक कांग्रेस के नेतृत्व में UPA की सरकार रही और उसका नेतृत्व सोनिया गांधी ने की। 2010 में इस बिल को राज्यसभा ने पास कर दिया लेकिन 2014 तक इसे लोकसभा में पेश ही नहीं किया गया। 2010 में राज्यसभा में इस विधेयक पर बहस के दौरान सपा के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव ने संसद में खड़ा हो कर महिला सांसदों के विरुद्ध अपशब्द कहे थे।

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आलेख श्लोक ठाकुर ने लिखा है

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