बिहार के प्रशासनिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक साथ 41 अंचल अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. इस बड़े फैसले को सरकार की ओर से अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मना जा रहा है। सरकार का साफ कहना है कि जनता से जुड़े कार्यों में लापरवाही, सरकारी कार्यक्रमों से दूरी और प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं की जाएगी। ‘नो वर्क, नो टॉलरेंस’ की नीति के तहत की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य स्पष्ट संदेश देना है कि सरकारी जिम्मेदारियों से समझौता करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
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जानकारी के मुताबिक, निलंबित किए गए अधिकारियों पर हड़ताल में शामिल होने, सरकारी अभियानों में बाधा डालने और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में सहयोग नहीं करने जैसे आरोप हैं। इसके अलावा, कई अधिकारियों पर राजस्व वसूली के लक्ष्य पूरे नहीं करने, उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं करने और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। इतना ही नहीं, 2027 की जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में बाधा पहुंचाने का मामला भी सामने आया है, जिसे सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहेगी। सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी और दोष साबित होने पर आगे की सख्त कार्रवाई भी हो सकती है, जिसमें सेवा पर स्थायी असर पड़ने की संभावना शामिल है। वहीं, इस फैसले के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसे दमनकारी बताते हुए कहा है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपने अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।




