जमुई जिले के मौरा–निजुआरा बालू घाट पर हो रहे कथित अवैध बालू खनन के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। अपनी खेती, सिंचाई व्यवस्था और पर्यावरण को बचाने के लिए किसानों ने सोमवार से माँगोंबंदर–गिद्धौर सड़क किनारे धोबघट चौक पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह धरना वन, पर्यावरण एवं नदी संरक्षण समिति, जमुई के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है।
धरना दे रहे किसानों ने प्रशासन के सामने पाँच प्रमुख माँगें रखी हैं। पहली माँग है कि मौरा बालू घाट की पब्लिक हियरिंग की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए। दूसरी माँग बालू खनन पदाधिकारी और लघु सिंचाई विभाग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की है। तीसरी माँग बरनार नदी के बीच बनी अवैध सड़क को तुरंत तोड़ने की है। चौथी माँग मौरा ब्लॉक-11 में मानकों के खिलाफ हो रहे खनन पर तत्काल रोक लगाने की है। वहीं पाँचवीं माँग मौरा, निजुआरा, प्रधानचक और धोबघट समेत सभी सिंचाई पईनों (नहरों) की सुरक्षा और उनके सही संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की है।
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किसानों का कहना है कि वर्ष 2018 से इस मुद्दे को लेकर वे लगातार संघर्ष कर रहे हैं। पहले खनन बंद कराया गया था, लेकिन अब उसी स्थान पर फिर से खनन की अनुमति दे दी गई है। किसानों ने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट और माफिया राज के कारण नदियाँ और खेती दोनों बर्बाद हो रही हैं। बालू खनन से नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है।
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धरना स्थल पर मौजूद किसानों और पर्यावरणविदों ने साफ कहा कि जब तक अवैध और मानकों के विपरीत हो रहे खनन को पूरी तरह बंद नहीं किया जाता और सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं होती, तब तक यह धरना जारी रहेगा। समिति के सदस्यों ने इसे केवल किसानों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई बताया है।